Thursday, February 2, 2023
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Satellite क्या है कैसे काम करते हैं सम्पूर्ण जानकारी

Satellite क्या है (Satellite in Hindi). सैटेलाइट के बारे में तो आपने जरुर सुना होगा. टीवी न्यूज़ में अक्सर सैटेलाइट लॉन्च के बारे में सुनने को मिलता है जिन्हें विभिन्न अंतरिक्ष एजेंसियों जैसे नासा या इसरो के द्वारा लॉन्च किया जाता है. उस दौरान आपके मन में ये सवाल जरूर आए होंगे कि आखिर ये सैटेलाइट क्या हैं और अंतरिक्ष में कैसे उड़ते हैं और इनका काम क्या होता है?

आज इन्ही सवालों के जवाब के साथ आपको newstoday.co.in पर यह खास लेख पढ़ने को मिलेगा. इस पोस्ट में आपको सैटेलाइट क्या होता है, सैटेलाइट कैसे काम करता है, सैटेलाइट के प्रकार इत्यादि के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी. तो चलिए आगे बढ़ते हैं बिना किसी विलंब के और जानते हैं सैटेलाइट से जुड़ी पूरी जानकरी हिंदी में.

Satellite क्या है? – What is Satellite in Hindi

सैटेलाइट अंतरिक्ष में मौजूद उस वस्तु को कहते हैं जो किसी ग्रह या तारे के चारों तरफ परिक्रमा करती है. सैटेलाइट (उपग्रह) प्राकृतिक भी हो सकते हैं और कृत्रिम भी (manmade या artificial). जैसे चंद्रमा पृथ्वी के चारों तरफ परिक्रमा करता है तो यह पृथ्वी का satellite है, और पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है तो यह सूर्य का satellite है. इसी प्रकार International Space Station (ISS) एक artificial satellite है जो पृथ्वी की परिक्रमा करता है.

हमारे सौर मंडल में दर्जनों प्राकृतिक उपग्रह हैं जो किसी ग्रह की परिक्रमा करते हैं. वहीं हजारों की संख्या में artificial satellites हैं जो पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं. कुछ satellites पृथ्वी की फोटो लेते रहते हैं जिससे मौसम वैज्ञानिकों को मौसम के बारे में जानकारी मिलती रहती है. जबकि कुछ सैटेलाइट्स दूसरे ग्रहों, सूर्य, ब्लैक होल्स और दूर स्थित आकाश गंगाओं की फोटो लेते रहते हैं. इन फोटो की मदद से वैज्ञानिकों को सौरमंडल और ब्रह्मांड को अच्छे से समझने में मदद मिलती है.

इसे आसानी से समझे तो एक छोटा ऑब्जेक्ट जो अपने से कहीं बड़े ऑब्जेक्ट के चारों तरफ अन्तरिक्ष में चक्कर लगा रहा है Satellite कहलाता है इसे हम हिंदी में उपग्रह भी कहते हैं इस हिसाब हमारी प्रथ्वी के चारों और चक्कर लगाने वाला चंद्रमा भी एक Satellite है लेकिन यह एक प्राकृतिक Satellite या उपग्रह है जो इंसान के हिसाब से नहीं चलता है लेकिन इसी से प्रेरणा लेकर इंसान ने अपने खुद के सैटेलाइट बनाकर उन्हें प्रथ्वी की कक्षा में छोड़ दिए है जो हम इंसान के लिए बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. आपको बता दे कि मानव द्वारा निर्मित सैटेलाइट एक छोटे से टीवी के आकार से लेकर एक बड़े ट्रक के बराबर भी हो सकती है यहां इनकी साइज़ इनके काम पर निर्भर करती है.

सैटेलाइट के दोनों तरफ सोलर पैनल होते हैं जिनसे इनको ऊर्जा यानी बिजली मिलती रहती है वहीं इनके बीच में ट्रांसमीटर और रिसीवर होते हैं जो सिग्नल को रिसीव या भेजने का काम करते हैं इसके अलावा कुछ कण्ट्रोल मोटर भी होती हैं जिनकी मदद से हम Satellite को रिमोटली कण्ट्रोल कर सकते हैं इनकी स्थिति को चेंज करना हो या फिर एंगल चेज करना हो सब इन कण्ट्रोल मोटर के जरिये कर सकते हैं. इसके अलावा सैटेलाइट को किस काम के लिए बनाया गया है वह ऑब्जेक्ट आपको सैटेलाइट में देखने मिल जाते हैं जैसे उपग्रह को प्रथ्वी की इमेज लेने के लिए बनाया गया है तो सैटेलाइट में बड़े कैमरे भी लगे होते हैं या फिर स्कैनिंग के लिए बनाया गया है तो उसमे स्कैनर देखने को मिल जायेंगे ये सब Satellite के कार्य पर निर्भर करता है. मुख्यतः उपग्रह को हम कम्युनिकेशन के लिए काम में लेते हैं क्योंकि रेडियो और ग्राउंड वेब धरती के पूरी कम्युनिकेशन में काम नहीं आ सकते हैं इसलिए ज्यादातर Satellite कम्युनिकेशन के काम में लिए जाते हैं.

अन्य सैटेलाइट्स का इस्तेमाल मुख्य तौर पर communication के लिए किया जाता है, जैसे tv signals और phone calls को दुनियाभर में भेजना. इसके साथ ही 20 से अधिक satellites का एक ग्रुप है जिसका इस्तेमाल Global Positioning System (GPS) तैयार के लिए किया जाता है. GPS की मदद से satellites आपकी सटीक लोकेशन का पता लगा सकते हैं. 

Satellite कैसे काम करता है? 

जैसा की हम जानते हैं satellite एक self-contained communication system होता है जो पृथ्वी से signal प्राप्त करता है और response में signal वापस पृथ्वी तक भेजता है. एक satellite को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि वह तय किए गए अपने operational life के दौरान अंतरिक्ष के प्रतिकूल वातावरण को सहन कर सके जहां उसका सामना रेडिएशन और अत्यधिक तापमान से हो सकता है. इसके साथ ही सैटेलाइट हल्का होना चाहिए. क्योंकि लॉन्चिंग का खर्च satellite के वजन पर ही निर्भर करता है. इसलिए इन सभी मुश्किलों से निपटने के लिए satellite हल्के और मजबूत धातु से बना हुआ होना चाहिए. अंतरिक्ष में sattelite के रखरखाव या मरम्मत (maintenance) की संभावना नहीं होती, इसलिए इसका 99.9% से अधिक विश्वसनीयता पर काम करना जरूरी होता है.

सैटेलाइट के parts इसके function के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ components लगभग सभी satellites के कॉमन पाए जाते हैं जो कुछ इस प्रकार हैं:

Antenna: ऐन्टेना सिस्टम का इस्तेमाल पृथ्वी से signal प्राप्त करने और वापस ट्रांसमिट करने के लिए किया जाता है.

Command और Data Handling: इसे हम satellite का ऑपरेशनल हार्ट कह सकते हैं. Command और control systems सैटेलाइट के प्रत्येक पहलू पर निगरानी रखते हैं और ऑपरेशन के लिए पृथ्वी से command प्राप्त करते हैं.

Guidance और Stabilization: सैटेलाइट में लगे sensors कक्ष में satellite के स्थान की निगरानी करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि यह सही दिशा में जा रहा है. जरूरत पड़ने पर thrusters और अन्य उपकरण satellite की दिशा और स्थान को एडजस्ट करते हैं.

Housing: इसे मजबूत धातु से बनाया जाता है ताकि अंतरिक्ष के प्रतिकूल वातावरण को सहन कर सके और बिना नुकसान के काम किया जा सके.

Power: अधिकतर सैटेलाइट्स सोलर पैनल का इस्तेमाल कर सूर्य की किरणों को बिजली में बदलते हैं.

Transponders: अपलिंक और डाउनलिंक signal अलग-अलग frequencies पर आते-जाते हैं. Transponders अपलिंक की गई आवृत्तियों (frequencies) को डाउनलिंक आवृत्तियों में तब्दील करते हैं और फिर परिवर्तित ट्रांसमिशन को पृथ्वी पर भेजने के लिए बढ़ाते (amplfy) हैं.

Payload: जानकारियां इकट्ठा करने के लिए payload का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे camera या particle detector.

Satellites इतने महत्वपूर्ण क्यों है?

Satellites किसी पक्षी की तरह धरती या दूसरे ग्रह के बड़े क्षेत्रों को एक बार में देख सकते हैं. यानी की satellites धरती पर मौजूद उपकरणों की बजाय अधिक और तुरंत डेटा एकत्रित कर सकते हैं. पृथ्वी से देखे जाने वाले किसी telescope की तुलना में satellite के जरिए अंतरिक्ष को बेहतर तरीके से देखा जा सकता है. क्योंकि satellite बादलों और वातावरण में मौजूद dust और molecules से ऊपर उड़ते हैं जो पृथ्वी से देखने पर बाधा बनते हैं.

सैटेलाइट के आने से पहले signals को दूर तक भेजना संभव नहीं था. क्योंकि टीवी सिग्नल्स केवल एक सीधी रेखा में ट्रेवल कर सकते थे. इसलिए ये signals अंतरिक्ष में फीके पड़ जाते थे बजाय पृथ्वी के वक्र (curve) को फॉलो करने के. साथ ही कभी-कभी पहाड़ और उंची इमारतें इन्हें ब्लॉक कर देती थी. दूर स्थित इलाकों में phone calls में भी दिक्कत होती थी. लंबी दूरी तक और पानी के नीचे telephone तार बिछाना मुश्किल और महंगा पड़ता था. अब सैटेलाइट के साथ Tv signals और phone calls को ऊपर satellite तक भेजा जाता है और फिर लगभग उसी समय सैटेलाइट इन signals को पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर भेज सकता है.

Satellite अंतरिक्ष में कैसे टिका रहता है?

अधिकतर satellites को रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में लॉन्च किया जाता है. Satellite तभी पृथ्वी की परिक्रमा करता है जब उसकी स्पीड पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण (gravity) खिंचाव की वजह से संतुलित (balanced) होती है. बिना इस संतुलन के satellite अंतरिक्ष में एक सीधी रेखा में उड़ सकता है. सैटेलाइट्स अलग-अलग ऊँचाइयों, स्पीड और रास्ते पर पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं.

मुख्य तौर पर satellites इन तीन orbits में परिक्रमा करते हैं जो कुछ इस प्रकार हैं:

Low-Earth Orbitयह ऑर्बिट धरातल से 160 से 2000 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है. इस ऑर्बिट में ही अधिकतर human missions को पूरा किया जाता है जो दूसरे ग्रहों से संबंधित नहीं होते. इसके अलावा International Space Station भी इसी ऑर्बिट में परिक्रमा करता है.

Geostationary Orbitयह वह क्षेत्र है जिसकी ऊंचाई पृथ्वी की भूमध्य रेखा (equator) से 35,786 km ऊपर है. कम्युनिकेशन सैटेलाइट के इस्तेमाल के लिए यह बिल्कुल सही स्थान है. इस orbit में satellites पश्चिम से पूर्व दिशा में ट्रेवल करते हैं. यह उसी दिशा और गति के साथ घूमते हैं जिस गति और दिशा के साथ पृथ्वी घूमती है. पृथ्वी से देखने पर geostationary satellites हमेशा एक ही स्थान पर दिखाई देते हैं, क्योकिं ये पृथ्वी से ऊपर एक ही स्थान पर मौजूद रहते हैं.

Polar Orbit: पोलर ऑर्बिट low earth orbit का ही एक subtype है जिसकी ऊंचाई पृथ्वी के तल से 200 से 1000 किलोमीटर के बीच होती है. इस ऑर्बिट में satellites ध्रुव से ध्रुव (pole-to-pole) उत्तर दक्षिण दिशा में ट्रेवल करते हैं. उदाहरण के लिए मौसम सैटेलाइट और सैनिक परीक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले सैटेलाइट.

Artificial या Man Made Satellites कितने प्रकार के होते हैं? – Types of Satellites in Hindi

मुख्य तौर पर satellites दो प्रकार के होते हैं: प्राकृतिक और कृत्रिम सैटेलाइट्स. लेकिन बात करें कृत्रिम सैटेलाइट्स (artificial या manmade) की तो ये 11 प्रकार के होते हैं जो कुछ इस प्रकार हैं:

1. Astronomical Satellites: ये वे सैटेलाइट्स हैं जिनका इस्तेमाल दूर स्थित ग्रहों, ब्रह्मांड और अन्य बाहरी अंतरिक्ष वस्तुओं के अध्ययन के लिए किया जाता है. 

2. Bio Satellites: ये वे सैटेलाइट्स हैं जिनका इस्तेमाल अंतरिक्ष में जीवित जीवों को ले जाने के लिए किया जाता है. आमतौर पर वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए इनका इस्तेमाल होता है.

3. Communication Satellites: इन satellites का इस्तेमाल टेलीकम्यूनिकेशन उद्देश्यों के लिए किया जाता है. आधुनिक communication satellites आमतौर पर geostationary या geosynchronous orbit, molniya orbit या low-earth orbit का इस्तेमाल करते हैं.

4. Navigation Satellites: ये satellites सक्षम mobile receivers पर ट्रांसमिट किए गए रेडियो टाइम सिग्नल का इस्तेमाल करते हैं जमीन पर उनकी सटीक लोकेशन का पता करने के लिए. उदाहरण के लिए Global Positioning System (GPS).

5. Weather Satellites: इनका इस्तेमाल पृथ्वी पर मौसम और जलवायु की निगरानी करने के लिए किया जाता है.

6. Earth Observation Satellites: इनका इस्तेमाल मैप बनाने के लिए, पर्यावरण पर निगरानी रखने और मौसम विज्ञान से जुड़ी जानकारियां प्राप्त करने के लिए किया जाता है.

7. Killer Satellites: ये वो satellites हैं जिनका इस्तेमाल दुश्मनों के हथियार, सैटेलाइट्स और अन्य अंतरिक्ष सम्पति तबाह करने के लिए किया जाता है.

8. Crewed Spacecraft: इन्हें spaceships भी कहा जाता है. ये बड़े satellites होते हैं जो मानव को orbit या इससे आगे छोड़ने और उन्हें वापस लाने में सक्षम होते हैं. इनमें प्रमुख लैंडिंग सुविधाएं मौजूद होती हैं और इनका इस्तेमाल ऑर्बिटल स्टेशन से आने-जाने के लिए किया जाता है.

9. Miniaturized Station: ये सैटेलाइट्स आकार में छोटे और कम वजन वाले होते हैं. वजन के हिसाब से उन्हें तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है: minisatellite (500-1000 Kg), microsatellite (100 Kg से कम) और nanosatellite (10 Kg से कम).

10. Space Based Solar Power Satellites: ये वो satellites हैं जिनका इस्तेमाल सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा लेने और उसे पृथ्वी या अन्य किसी जगह पर इस्तेमाल के लिए संचारित करने के लिए किया जाता है.

11. Space Stations: ये artificial orbital structure होते हैं जिनका निर्माण इंसानों के बाहरी अंतरिक्ष में ठहरने के लिए किया जाता है. अंतरिक्ष स्टेशनों को कुछ दिनों, हफ़्तों, महीनों या वर्षों की अवधि तक कक्षा (orbit) में रहने के लिए डिज़ाइन किया जाता है.

Satellites का उपयोग कहां-कहां किया जाता है?

सैटेलाइट्स का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाता है:

  • सैटेलाइट्स का इस्तेमाल tv signals को ट्रांसमिट करने के लिए किया जाता है. बिना सैटेलाइट टीवी सिग्नल एक ही दिशा में travel कर सकते हैं और इमारतों और पेड़ों से बाधित हो सकते हैं.
  • मोबाइल कम्युनिकेशन के लिए भी सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे स्थान जहां वायर पहुंचना संभव नहीं है, वहां satellites के जरिए आसानी से phone signals भेजे जा सकते हैं.
  • Navigation के लिए satellites का इस्तेमाल किया जाता है. उदाहरण के लिए Global Positioning System (GPS). जिसका इस्तेमाल mobile phones और कार में location पता करने के लिए किया जाता है.
  • मौसम वैज्ञानिक, मौसम का पता लगाने के लिए सैटेलाइट्स का इस्तेमाल करते हैं. जो उन्हें प्राकृतिक आपदाएं जैसे बारिश, तूफान इत्यादि के बारे में पहले ही जानकारी दे देते हैं.
  • जलवायु और पर्यावरण की निगरानी के लिए satellites का इस्तेमाल किया जाता है. इन सैटेलाइट्स की मदद से समुद्र, ग्लेशियर इत्यादि पर नजर रखी जा सकती है. इसके साथ ही सैटेलाइट के जरिए वैज्ञानिक वर्षा, वनस्पति आवरण और ग्रीन हाउस उत्सर्जन के लॉन्ग टर्म पैटर्न को निर्धारित कर सकते हैं.
  • Earth Observation Satellites के जरिए समुद्र और हवा की लहरों पर नजर रखी जा सकती है. साथ ही जंगली आग, तेल रिसाव और वायु जनित प्रदूषण के बारे में भी पता लगाया जा सकता है.
  • सैन्य कार्यों के लिए भी सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जा सकता है जो दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रख सकता है और उनके सैन्य ठिकानों का पता लगा सकता है.
  • दूर स्थित ग्रह, ब्रह्मांड या अन्य अंतरिक्ष संबंधी चीजों का पता लगाने के लिए सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाता है.
  • सैटेलाइट्स के जरिए भूमिगत पानी और खनिज स्त्रोतों का पता लगाया जा सकता है. इसके साथ ही बड़े पैमाने पर फैले बुनियादी ढांचे की निगरानी की जा सकती है, जैसे oil pipelines जिनमें रिसाव का पता लगाना है.

एक उपग्रह (satellite) को दूसरे उपग्रह से टकराने से कैसे रोका जाता है?

पृथ्वी की कक्षा में लगभग 5 लाख आर्टिफीशियल सैटेलाइट्स मौजूद हैं जो पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं. इनमें केवल कुछ ही satellites हैं जो उपयोग के लायक हैं. यानी कि अंतरिक्ष में बहुत सारा कबाड़ भी तैर रहा है.

ऐसे में जब भी कक्षा (orbit) में कोई satellite छोड़ा जाता है तो टकराव का जोखिम बहुत बढ़ जाता है. स्पेस एजेंसियां जब भी अंतरिक्ष में कुछ लॉन्च करती है तो वे सबसे पहले orbital रास्ते को लेकर विचार करती हैं.

कुछ एजेंसियां, जैसे कि United State Space Surveillance Network, कक्षीय कचरे पर पृथ्वी से नजर रखती हैं. यदि किसी भटके हुए टुकड़े का किसी जरुरी वस्तु से टकराने का खतरा होता है तो ये space agencies को अलर्ट करती हैं.

भारत के कितने सैटेलाइट्स हैं?

1975 में लॉन्च किए गए भारत के पहले उपग्रह आर्यभट्ट से 2021 में श्री शक्ति सैट तक भारत 125 सैटेलाइट्स लॉन्च कर चुका है. इनकी लिस्ट को आप यहाँ क्लिक करके देख सकते हैं.

Satellite Phone क्या है?

Satellite phone वह फोन है जिसे दूसरे phone या telephone network से जोड़ने के लिए satellites का इस्तेमाल किया जाता है. यानी इसके लिए पृथ्वी पर मौजूद cell sites का इस्तेमाल नहीं किया जाता. 

इसका सबसे बड़ा फायदा है कि इसका कोई सिमित दायरा नहीं है और इसे पृथ्वी के किसी भी स्थान पर इस्तेमाल किया जा सकता है. सैटेलाइट फोन के इस्तेमाल के दौरान सिग्नल सैटेलाइट फोन से निकलता है और सैटेलाइट तक जाता है. इसके बाद यह सिग्नल वापस पृथ्वी पर मौजूद दूसरे फोन में भेजा जाता है.

Conclusion

मैं उम्मीद करता हूँ आपको मेरा यह लेख “Satellite क्या है और कैसे काम करता है?” जरूर पसंद आया होगा. मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है Satellite in Hindi से जुड़ी हर जानकारी को सरल शब्दों में explain करने की ताकि आपको इस विषय के संदर्भ में किसी दूसरी website पर जाने की जरूरत ना पड़े.

अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो या कुछ नया सीखने को मिला हो तो कृपया इसे दूसरे social media networks जैसे whatsapp, facebook, telegram इत्यादि पर share जरूर करें.

सैटेलाइट को हिंदी में उपग्रह कहा जाता है। जैसे पृृथ्वी ग्रह का उपग्रह चांद है। एक उपग्रह ग्रह के चक्कर काटता है यानी अंतरिक्ष की बात करें तो छोटा object बड़े के चक्कर काटता है। जिस तरह चांद पृृथ्वी के चक्कर काटता है। इसी तरह वैज्ञानिकों द्वारा बनाए गए यह सैटेलाइट पृथ्वी की कक्षा में स्थापित होकर वहां से सिग्नल भेजते हैं, जिन्हें स्कैन कर वैज्ञानिक इमेजिंग, नेविगेशन और कम्युनिकेशन में इस्तेमाल करते हैं। मसलन इनसे मिलने वाले सिग्नल के जरिये ही टीवी देखना, मौसम का हाल बताना, मोबाइल में जीपीएस नेविगेशन, फोन पर बातचीत आदि संभव हुआ है। कार्य और इस्तेमाल के हिसाब से इनके आकार अलग-अलग होते हैं।

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